सुन कबीर की बात; हे साधु-बेरोजगार—sun kabeer…

सुन कबीर की बात

 

हे साधु-बेरोजगार

 

त्याग डिग्री

 

फेंक गर्व

 

चल साथ बाजार

 

कर विनती

 

मांग काम

 

मिला!

 

नहीं मिलेगा

 

यह दौर ही ऐसा है

 

कबीर ने भी कहा था

 

बाजार में खड़े होकर

 

लकुटि ले साथ चल

 

वह युग बदला कहां

 

बदला तो सिर्फ

 

आज का कबीर

 

उसकी लकुटि

 

मत भूल

 

डंडे का जमाना है

 

गर्व, डिग्री, विनती, आत्म सम्मान

 

बीते जमाने की बात

 

उतार नकाब शराफत का

 

खड़ा हो बाजार में

 

खड़का लकुटि

 

मिलेगी उजरत

 

हे साधु-बेरोजगार— mohan thanvi

 

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जीवन–JEEVAN

जीवन

रेत का भी जीवन है

अपना संसार है

समाई धूप की गर्मी है

आसपास बिखरे कांटे हैं

कहीं रेत पर गुलिस्तां बने

कहीं ताल तलैया खुदे

कहीं गगनचुंबी इमारतें हैं

खेत किनारे रेललाइन है

इसी रेत में पनपे पेड़ हैं

मंदिर इसी पर खड़े

मस्जिद इस पर बनी

गुरुद्वारे-चर्च भी रेत पर

घर भी बनाये हैं लोगों ने रेत पर

सपने भी बुने हैं लोगों ने रेत पर

हवा जब बहती है तेज रेत भी उड़ती है

रेत पर लहराता जीवन संवरता रहता

नश्वर यह संसार रेत में ही मिल जाता

रेत का ही जीवन है