पतंग

पतंग

पतंग 21वीं सदी की जिन्दगी

अट्टालिकाओं के पीछे

आसमान में पतंग

कांटों में अटकी डोर

तालाब रीते

poem - patang - si - zindagi
poem - patang - si - zindagi

कुओं में मेढक भरे

खेत बने फैक्ट्रियां

धुआं उगलती गलियां

रोही में कंटीली झाड़ियां

पतंग उड़ी या कटी डोर

उलझी रही कांटों में पतंग

पतंग 21वीं सदी की जिन्दगी

 

 

 

Advertisements