रात गहराने का मतलब , खुशियों भरी सुबह का और करीब आ जाना .

रोशनी  में  ग़ुम  रंग
mohan thanvi
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जब   यादो  के  वातायन  से  झांकता  कोई  सामने  होता … मुस्कराता …मुझे  छूने  को  आतुर  हाथ  बढ़ता  … मैं  बाहों  मे  भर  उसका  चेहरा  … आंसू  छिपा  लेता … मुस्कराता  मेरा  विश्वास…!
रात  गहराने  का  मतलब ,   खुशियों  भरी सुबह  का  और  करीब  आ  जाना .
सूर्य  उदय  हो  रहा  था  और  पूर्व  दिशा  मे  दूर  तक  क्षितिज  अद्भुत  रगों  से  आकर्षित  कर  रहा  था . कुछ  ही  देर  मे  पक्षियों  के  कलरव  क़ी  गूंज  के  बीच  प्राण-दाता रविराज  मुस्कराए  और  उनकी चमक  से  आकाश  धवल  हो  गया . उस  शक्ति  ने  रंगों  को  सोख  लिया . रोशनी  के  जन्म  के   साक्षी वे  रंग  ग़ुम हो  गए…

श्रमिक की नहीं जहां सुनवाई की दुकान वह बाजार ध्वस्त वह समाज पस्त ही रहता

श्रमिक की नहीं जहां सुनवाई की दुकान

वह बाजार ध्वस्त वह समाज पस्त ही रहता

mohan thanvi
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आग्नेय दिशा से बचकर

जहां से धुआं पक्षपात का है उठता

उन चूल्हों पर काबिज हैं सफेदपोश

पेट की भूख के वे दोषी

सूरज से पहले निकलते लोग घर से अंधेरे में लौटते

आंदोलनों के चूल्हे पर पकी खिचड़ी खाते

और, सभाओं-सभासदों से दूर डरते कहते

मेहनतकश के घर चूल्हा क्यों ठंडा रहता

आग्नेय विचारों के ईंधन से बनते नहीं पकवान

भाषण-प्रवचन ग्रह-नक्षत्र और दिशा के शूल चुभाते

श्रमिक की नहीं जहां सुनवाई की दुकान

वह बाजार ध्वस्त वह समाज पस्त ही रहता

पक्षपात के पक्षाघात से राष्ट्र त्रस्त ही रहता

धुआं हो जाता जहरीला अविश्वास का तवा तपता

और, चूल्हा भी आग्नेय दिशा से बचकर ठंडा रहता

श्रमिक की नहीं जहां सुनवाई की दुकान

वह बाजार ध्वस्त वह समाज पस्त ही रहता

इनसान और… भगवान !!! सर्वेसर्वा और… सर्वव्यापी

सुनार ने पीटा तो सोना चमक उठा। सुनार को धनवान बना दिया। चांदी को पीटा तो वो खिल उठी और सुनार को समृद्ध बना दिया। लोहार ने कूटा तो लोहा भी उपयोगी बन गया। कड़ा परिश्रम करने वाले लोहार का जीवनयापन सरल बना दिया। राजगीर ने मिट्टी में पानी मिलाया और गारा बनाया तो गगनचुंबी अट्टालिकाएं खड़ी हो गई। मिट्टी ने राजगीर को सृजनकर्ता बना दिया। मदारी ने बंदर को सधाया तो वो भी रोजगार का साधन और मदारी पारंपरिक एवं लोक कलाकार बन गया। भगवान ने इनसान को बनाया और… इनसान सर्वेसर्वा बन गया और… भगवान को सर्वव्यापी बना दिया… भगवान न दिखने वाला बन गया…!!!

bahubhashi
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गर्मी की दोपहर…

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गर्मी की दोपहर…..
दोपहर में होता खिलौना साथ
दीवारों की ओट हांफती चिड़िया
आ जाती हमारे किचन में
ढूंढ़ लेती पानी
नानी कहती, इसे संभालना बेटी
क्हीं बिल्ली न खा जाये
और हम जागते रहते
सारी दोपहर