Natak or Kavita : नाटक और कविता :

नाटक और कविता: हम सब एक नाटक के पात्र हैं। नाटक है जीवन। जीवन के इस नाटक में हम सभी की भूमिकाएं तय हैं। संवाद भी लिखे जा चुके हैं। उन दृश्यों के संवाद भी… जिनमें सिर्फ और सिर्फ प्रकृति झूमती है। पत्थर गाते हैं। आसमान… रो पड़ता है। खामोश रात के अंधेरे रंगबिरंगी किरणों के नृत्य से झूम कर गुनगुने लगते हैं। वही कविता होती है। खामोश संवादों की अदायगी काव्यमय होती है। इसके लिए कविता स्वयंमेव मुस्कराती है। कविता नहीं तो… ये नाटक… जीवन… संवाद विहीन हो जाता है। नाटक का अहम हिस्सा है… कविता।