New Themes: Hemingway Rewritten and Sweet Life

New Themes: Hemingway Rewritten and Sweet Life.

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ये रोषनी हमारे लिए है…

Aawo meet… Geet vahi gaate hain…
ये रोषनी हमारे लिए है… हमारे लिए है…
ये खुषियां हमारे लिए है… हमारे लिए है…
आषाओं का सागर लहराता यहां…
मन कबूतर पंख पसारता यहां…
विष्वास की मजबूत डोर से बंधे हैं सभी…
निराषा की जगह यहां नहीं है नहीं…
ये रोषनी हमारे लिए है… हमारे लिए है…
ये खुषियां हमारे लिए है… हमारे लिए है…

होली पर… इश्क में… क्या हाल बना लिया

होली पर
इश्क में मोहन ऐसा क्या हाल बना लिया
होली आई मगर पानी मिलना दुश्वार हो गया
न छोटों की आंख में बड़ों के लिए पानी
न नलों में ही आता पीने योग्य साफ पानी
होली पर इश्क के रंग में रंग गया मोहन दुनिया को भूल गया
मोहन मोहन करती रही गोपियां मोहन पिचकारी संग ले गया

एक संपादक का सच…

एक संपादक का सच… मुझे नहीं लगता था कि मेरे प्रकाशक महोदय को कुछ कहानियों में से एक का यह शीर्षक संग्रह के लिए आकर्षक लगेगा… अब बारी प्रकाशन की है। देखते हैं कब नंबर लगता है। कहानी उस खबर पर केंद्रित है जो संपादक महोदय ने अपने पाक्षिक में छापी लेकिन फिर उस खबर को देने वाले संपादक के सूत्रों सहित हर पक्ष उसे झुठलाने में जुट गया… फिर ऐसा कुछ हुआ कि… संपादक का सच सभी को मानना ही पड़ा…।