क्रिकेट: और भी हैं मुकाम । अंपायरिंग । सुरेश शास्त्री।

क्रिकेट: और भी हैं मुकाम । अंपायरिंग । सुरेश शास्त्री। आज से 23-24 साल पहले जब मैं उनसे पहली बार मिला था । उस समय भला हम यह कैसे जान सकते थे कि हैदराबाद में 30 दिसंबर 2013 का दिन उनके अंपायरिंग के कैरियर में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। वह दिन शास्त्री जी को 100 से अधिक प्रथम श्रेणी के मैचों में अंपायरिंग करने वाले पहले अंपायर बनने का सौभाग्य प्रदान करने वाला दिन है। अंपायर सुरेश शास्त्री 90 के दशक में एक बार बीकानेर आए थे। रेलवे स्टेडियम में क्रिकेट का मुकाबला हुआ था, रणजी। अंपायर सुरेश शास्त्री से अथवा क्रिकेट खेल से मेरा कोई सीधा नाता नहीं रहते हुए भी जब शास्त्री से मुलाकात हुई तो वे दिल में उतर गए और आज तक हमारे संबंध कायम हैं। सुरेश जी से मेरी मुलाकात आकाशवाणी बीकानेर के लिए श्री कुलविंदर सिंह कंग द्वारा लिए गए साक्षात्कार की प्रक्रिया के दौरान हुई। मैं अस्थाई कंपीयर/उद्घोषक के तौर पर आकाशवाणी से जुड़ा हुआ था, श्री कंग को जब बताया कि बीकानेर में अंपायर सुरेश शास्त्री जी आए हुए हैं तो उन्होंने शास्त्री जी की साक्षात्कार के लिए स्वीकृति लेने व उन्हें आकाशवाणी स्टूडियो तक लाने का दायित्व मुझे ही सौंप दिया। शास्त्री जी ने न केवल सहर्ष साक्षात्कार की स्वीकृति दी, बल्कि मेरी एम80 पर आकाशवाणी स्टूडियो भी चले। …यादों को ताजा करते हुए आपसे साझा करने का आनंद ले रहा हूं।

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