बचपन

दैनिक युगपक्ष में बचपन पर प्रकाशित मेरी 9 कविताएं। 

बचपन 

1

बदहवास कभी होता नहीं

चकराता पर चंचल रहता

पहाड़ लगता पिता का कंधा

नजर से उसे झुकाता

बचपन ऐसा मेरा फिर लौटा दो।।।

2

आंगन में

घुटनों के बल

सरकता जीवन

गमले के फूल

तोड़ने को मचलता

फूल फिर भी

गम छुपाता, मुस्कुराता

यूं ही जीवन बीतता जाता

3

दाढ़ी के बाल

नोंचता

फिर भी

दादा का प्यार पाता

शिशु

गीले आंचल में

सिमट जाता

फिर भी

दादी का असीम प्यार पाता

शिशु

4

खूब टपटप होती

जब चलती घोड़ागाड़ी

गांव में मेरे

शहर में वही आवाज

कमरे में गूंजती

जब टीवी पर दिखती

घोड़ागाड़ी

वह असली थी घोड़ागाड़ी

इसमें घोड़ा भी नकलीपन से

ऊबा हुआ दिखता है

अपने पीछे देख सजी गाड़ी

5

उस्तरा हाथ में आ गया है

सबको बंदर बना गया है

हुक्म चलाते, डंडा रखते पास

नहीं किसी को ऐसे

सरकारी बंदरों से

किसी काम की आस

6

गाय देख मचल जाता है मुन्ना

रोटी उसे खिलाऊंगा मैं नाना

घर के बाहर सुबह-सुबह वह आती

भरी दोपहर मोहल्ले के चौक में डेरा जमाती

मुन्ना खुश है नानाजी हैं नाराज

चौक में एक नहीं

बहुत सी गायें खड़ी हैं आज

7

शानू मानू पप्पू सूरज सभी के पास पटाखे

मां मुझको भी ला दो दो-चार पटाखे

फूलझड़ी और अनार चलाऊंगा

बम को सची दूर से ही

चिंगारी से सुलगाऊंगा

हवाई से लगता डर

कहीं बिस्तर पर ही न आ गिरे उड़कर

जमीन चकरी को बाहर आंगन में ही चलाऊंगा

मां मुझको भी ला दो दो-चार पटाखे

अकेला नहीं सची मैं

शानू मानू पप्पू सूरज के साथ चलाऊंगा

8

सच

बड़ा कड़ुवा

झूठ मीठा

लगता है पहले

फिर

उलट-पुलट हो जाता है

झूठ के पैर नहीं मिलते

सच यह पता चलने पर

बड़ा आनंद

सुकून

शांति देता है सच

पर यह सब

पहले से जानता है बचपन

9

पतंगा होता मैं

उड़ता उपर घरों के

छत पर खड़े लोगों को देखता

चिड़िया के पीछे पीछे

खेतों में जाता

खाने को मुझे दौड़ती चिड़िया तो

लाल आंखों से उसे डराता

पेड़ों पर जा बैठता रंग बदलकर

सूरज को छूने उड़ता

चांद को देख मुस्कुराता

धूप देख दुबक जाता कहीं छांव देख

चांदनी में इधर-उधर लहराता

पतंगा होता मैं

बच्चों की राजाजी की घोड़ी बनता

बैठता उनकी नन्हीं हथेली पर

मरता पर किताबों में रहता

– मोहन थानवी

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धरणीधर पर बीकानेर साहित्य महोत्सव में रचा इतिहास

‘कथारंग’ का हुआ जन-अनावरणबीकानेर 25/2/17 । बीकानेर में जन साधारण साहित्य-पाठकों ने शनिवार को धरणीधर रंगमंच पर एक इतिहास रच दिया। ऐसा पहली बार हुआ जब आम जन ने किसी कृति का अनावरण किया। जनार्पण की इस प्रक्रिया में शामिल 300 से अधिक लोगों ने किताब को खरीदा और जन-अनावरण किया। बीकानेर साहित्य महोत्सव में मेहनत और लगन से व्यावसायिक ऊंचाइयां छूने वाले लोगों के जीवन-संघर्ष पर आधारित कृति ‘हुनर और हौसले की कहानियां’ का भी जन-अनावरण हुआ। हर वर्ष बीकानेर साहित्य महोत्सव आयोजित करने का भी घोषणा की गई। 

150 कहानीकारों का सम्मान किया गया। विभिन्न सौपानों में रंगे उत्सव के एक चरण में काव्य-जुगलबंदी का आयोजन भी किया गया जिसमें  कवि-शायर राजेश विद्रोही और आनंद वि.आचार्य ने अपनी काव्य रचनाओं से रंग जमाया। कवियों को वरिष्ठ साहित्यकार भवानीशंकर व्यास विनोद और लक्ष्मीनारायण रंगा ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। सम्मान सत्र में मुख्य अतिथि पंचायत राज मंत्री राजेंद्रसिंह राठौड़ ने कहा कि कहानियां हमारे जन-जीवन से जुड़ी हुई है। बचपन से ही हमें कहानियों से माध्यम से ही सीख और समझ मिलती है। उन्होंने कहा कि बीकानेर में 150 रचनाकारों की कहानियां का संग्रह अपने आप में अनूठा प्रयास है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीकानेर विधायक (पश्चिम) डॉ.गोपाल जोशी ने कहा कथारंग जैसे प्रयास सम-सामयिक हैं। बीकानेर साहित्य महोत्सव के माध्यम से जन तक सृजन पहुंचाने का जो लक्ष्य लिया गया है, वह प्रासंगिक है। जो लिखा जा रहा है, उसे पाठक भी मिलने चाहिए। जनार्पण सत्र के मुख्य अतिथि  कविता कोश के संस्थापक सचिव ललित कुमार को भी सम्मानित किया गया।

उन्होंने भाषा से कटते बच्चों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के समय में भाषा के साथ हो रहे दुव्र्यवहार को बचाना बेहद जरूरी है। ललित कुमार ने बताया कि कविता कोश और गद्य कोश के माध्यम से वैश्विक स्तर पर साहित्य को प्रसारित करने का काम किया जा रहा है, इसी तरह से कथारंग का भी एक प्रयास है और इस तरह के प्रयासों से भाषा और साहित्य ही नहीं समाज का भी हित होगा। 

 विशिष्ट अतिथि व्यवसायी कन्हैयालाल बोथरा ने कहा कि कहानी की किताब के साथ व्यवसायियों के जीवन-संघर्ष पर आधारित यह किताब भी एक मील का पत्थर साबित होगी और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक किताब साबित होगी।  

अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी रामकिसन आचार्य ने इस बात पर चिंता जताई कि बहुत सारे साहित्यकारों का सृजन प्रकाश में नहीं आ पाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी लेखक का सृजन प्रकाशित हुए बगैर नहीं रहना चाहिए। ऐसे समय में कथारंग का प्रकाशन एक आशा जगाता है। 

स्वागताध्यक्ष वरिष्ठ रंगकर्मी-पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि कथारंग में दूसरी बार प्रकाशित कहानीकार इस बात के लिए आश्वस्त करते हैं कि उन्होंने कहानी विधा को पूरे मन से स्वीकार किया है।  संचालन इंज्लिश गुरु किशोरसिंह राजपुरोहित ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार भवानीशंकर व्यास ‘विनोद’, श्रीलाल जोशी, शिवराज छंगाणी, डॉ.उमाकांत, डॉ.मोहम्मद हुसैन सुचित्रा कश्यप व डॉ.ब्रजरतन जोशी को सम्मानित किया गया।

 उत्सव के संयोजक हरीश बी.शर्मा ने अपनी खुशी यूं  व्यक्त की – पाठक संस्कृति को तब ही बल मिलेगा जब साहित्य को खरीदकर पढ़ा जाएगा, इससे लेखक की भी जवाबदेही बढ़ेगी।

 दोनों कृतियों में यह है पहली बार :- 

गायत्री प्रकाशन की ओर प्रकाशित ‘कथारंग’ में बीकानेर शहर के 150 कहानीकारों की रचनाएं हैं जिनमें से 56 महिलाएं हैं। इस संग्रह में 1931 से 1998 की अवधि के बीच में जन्मे कहानीकार हैं। किसी निर्धारित भौगोलिक सीमा में रहने वाले कहानीकारों का संभवतया यह पहला संकलन है। इससे पहले भी बीकानेर से ही 75 कहानीकारों का संकलन कथारंग के रूप में प्रकाशित हो चुका है। दोनों के ही संपादक हरीश बी. शर्मा हैं। 

‘हुनर और हौसले की कहानियां’ बीकानेर के बिजनस-प्रोफेशनल्स की जीवन-संघर्ष पर आधारित कृति है। यह किताब युवाओं के लिए प्रेरणा का काम करेगी। इस किताब के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि सफलता का सूत्र तलाशने के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है, यहां भी ऐसे-ऐसे लोग हैं कि मार्गदर्शन दे सकते हैं। 

– मोहन थानवी

आप-हम करेंगे नवाचार; 25 फरवरी को साहित्यलोक में बीकानेर जोड़ेगा स्वर्णिम पृष्ठ

बीकानेर 24/2/17 ( मोहन थानवी )। आपको आमंत्रण मिल गया; बीकानेर में आप 25/2/17 को सुबह 10:15 बजे साहित्य जगत में नवाचार करने वालों में शामिल हो रहे हैं। जी हां; दो संग्रहणीय और प्रेरणादायी कृतियों का आप सभी जन अनावरण करने धरणीधर रंगमंच पर आ रहे हैं। यह आमंत्रण है और विनम्र अपील भी। आपको बता दें कि इस वृहद बीकानेर साहित्य उत्सव के  एक सत्र में आतिथ्य होगा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़; राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी;  बीकानेर विधायक (पश्चिम) डॉ.गोपाल जोशी का और    दूसरे सत्र  में  सान्निधय मिलेगा कविताकोश व गद्यकोश के संस्थापक संयोजक ललित कुमार; कविता कोश व गद्य कोश की सह-संयोजक श्रीमती शारदा सुमन; व्यवसायी कन्हैयालाल बोथरा;  समाजसेवी रामकिसन आचार्य का तथा दोनों सत्रों में स्वागताध्यक्ष होंगे वरिष्ठ रंगकर्मी, पत्रकार व साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी । और आप-हम; यानी परिसर में मौजूह हर वह शख्स कृतियों का अनावरण करेगा; जिसके हाथों में वहीं पर मात्र 300 रुपयों में उपलब्ध   बीकानेर के 150 रचनाकारों की कहानियों के संकलन ‘कथारंग तथा मेहनत व संघर्ष से अपना मकाम बनाने वाले सफल उद्यमियों पर आधारित ‘हुनर और हौसले की कहानियों की कृति होगी। इन दोनों कृतियों का सामुदायिक  लोकार्पण भी होगा और ऐसा नवाचार करेंगे आप-हम।  यह एक दिवसीय कार्यक्रम दो सत्रों में होगा। कार्यक्रम के संयोजक हरीश बी.शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम ‘जन तक सृजन अभियान की अगली कड़ी है जिसमें दोनों कृतियों का अनावरण भी आम जन करेंगे। उपस्थित लोक के प्रतिनिधियों के माध्यम से होने वाला किताबों का यह अनावरण समारोह अपने आप में अलग होगा। इसके लिए आम जन की भागीदारी के लिए संपर्क भी किया जा रहा है। लोकार्पण समारोह के पश्चात दूसरे सत्र का आयोजन ‘काव्य-धारा से शुरू होगा। लाडनूं के कवि-शायर राजेश विद्रोही व बीकानेर के आनंद वि. आचार्य  की कविताओं से प्रारंभ होने वाले इस कार्यक्रम में कथारंग के कहानीकारों  को सम्मानित किया जाएगा। 

खास बात : आपके सहयोग से ही यह संभव होगा। 

कृतियों में है यह :-

 ‘कथारंग में कुल 150 कहानीकार हैं, इनमें से 56 महिलाएं हैं। सभी कहानियों पर बीकानेर के छह विद्वानों ने टिप्पणी की है। और अर्द्ध शतक से भी अधिक संख्या में सफल उद्यमियों पर आधारित ‘हुनर और हौसले की कहानियों की कृति से हम जान सकते हैं बीकानेर के टाटा; अंबानी; अडानी जैसे बिजनेस प्रोफेशनल्स को।

कहानीकार-व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा को साहित्य अकादेमी पुरस्कार उनके  22 फरवरी को

बीकानेर/ 18 फरवरी/ राजस्थानी और हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार-व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा को साहित्य अकादेमी मुख्य पुरस्कार उनके राजस्थानी कहानी संग्रह ‘मरदजात अर दूजी कहाणियां’ के लिए बुधवार 22 फरवरी को सायं 5.30 बजे नई दिल्ली के कॉपरनिकस मार्ग स्थिति कमानी सभागार में अकादेमी अध्यक्ष प्रख्यात मराठी लेखक जयंत विष्णु नारळीकर, साहित्य अकादेमी अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, उपाध्यक्ष चंद्रशेखर कम्बार एवं अकादेमी सचिव के. श्रीनिवासराय अर्पित करेंगे।बुलाकी शर्मा को पुरस्कार स्वरूप समारोह में साहित्य अकादेमी द्वारा प्रतीक चिह्न, शॉल, साफा आदि के साथ एक लाख रुपये राशि का चेक भी प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के अगले दिन गुरुवार को साहित्य अकादेमी के रवींद्र भवन परिसर में प्रातः 10.30 बजे शर्मा अपने रचनात्मक अनुभव अन्य सम्मानित रचनाकारों के साथ साझा करेंगे। मुक्ति सचिव कवि कहानीकार राजेंद्र जोशी ने बताया कि बुलाकी शर्मा को साहित्य अकादेमी सम्मान से पूर्व राजस्थान साहित्य अकादेमी उदयपुर और राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के अलाव अनेक संस्थाओं ने सम्मानित तथा पुरस्कृत किया है, वे विगत चालीस वर्षों से गद्य लेखन कर रहे है। बुलाकी शर्मा की विविध विधाओं में करीब दो दर्जन पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं तथा वे कहानी, व्यंग्य, नाटक, बाल साहित्य के अलावा अनुवाद कार्य हेतु भी पहचाने जाते हैं। उन्होंने लंबे समय तक कॉलम लेखन विभिन्न नामों से किया और इन दिनों वे राजकीय सेवाओं से अवकाश प्राप्त कर स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। 

– मोहन थानवी

बीकानेर में 20 Hours Refresher Courses Programme” शुरू

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बीकानेर में  18/2/17 को 20/02/2017 तक चलने वाले तीन दिवसीय  ”20 Hours Refresher Courses Programme”  शुरू गया । इस मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीकानेर, श्रीगंगानगर, चुरू, हनुमानगढ़, सीकर, के अलावा अधिकारीगण एवं नामित अधिवक्तागण ने भाग लिया।  कार्यशाला की अध्यक्षता जिला एवम् सेशन न्यायाधीश राधा मोहन चतुर्वेदी ने की।  मधुसूदन राय, जज इंचार्ज द्वारा बुके भेंटकर न्यायिक अधिकारी व प्रशिक्षणगण का स्वागत किया गया। इस कार्यशाला का विषय प्रशिक्षक मध्यस्थ द्वारा प्रतिभागीगण को प्रशिक्षण प्रदान किया जाना है। कार्यशाला में  विषय की जानकारी  मास्टर ट्रेनर  तरित बरण कर प्रशिक्षक मघ्यस्थ झारखण्ड़,  अर्चना मिश्रा एडीजे महिला उत्पीड़न, भरतपुर,  बालकिशन गोयल एडीजे नं.2 अजमेर, तथा  कुलदीप कुमार जैन अधिवक्ता अलवर ने स्लाईड प्रजेन्टेशन के माध्यम से दी व मध्यस्थता गतिविधियों की वर्तमान में आवश्यकता व उपयोगिता के बारे में चर्चा की गई। मध्यस्थ द्वारा पक्षकारों में समझौता करवाये जाने संबंधी कर्तव्य को रोल प्ले के माध्यम से समझाया गया। रोल प्ले के माध्यम से सफल मध्यस्थ की कार्यशैली को भी समझाया। 

 जिला न्यायाधीश महोदय द्वारा बताया गया कि मध्यस्थता विवाद के निस्तारण करने हेतु मुकदमेबाजी की तुलना में काफी बेहतर प्रक्रिया है। मध्यस्थता प्रक्रिया से विवाद का निस्तारण होने में प्रकरण का पूर्णतः तथा अंतिम रूप से निस्तारण हो जाता है तथा न्यायालय में लम्बित प्रकरणों का भार कम हो जाता है और पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बना रहता है इसलिये मघ्यस्थता द्वारा विवाद के निस्तारण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस समस्त कार्यक्रम का संचालन श्री राम अवतार सोनी पूर्णकालिक सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  द्वारा किया गया। 

– मोहन थानवी

बहुभाषायी कविताओं से चहचहा उठा “ढोला-मारू”

बीकानेर 12/2/17 ( मोहन थानवी ) । टूरिस्ट होटलों में यूं तो प्राय: देशी-विदेशी विभिन्न बोलियों-भाषाओं के स्वर गूंजते हैं मगर 12 फरवरी को बसंतोत्सव के माहौल में सराबोर छोटी काशी सदृश्य बीकाणा नगरी के होटल ढोला-मारू में बहुभाषायी लय-ताल की गूंज पर भारतीय संस्कृति मानो स्वयं नाद करने लगी। काव्योत्सव के रंग में डूबे कवियों ने मानवीय संवेदनाओं को उकेरते हुए जहां खुशी के फूल बरसाए वहीं  बंगाली; पंजाबी; डिंगल; उर्दू; राजस्थानी; सिंधी; हिंदी; अंग्रेजी आदि विभिन्न भाषाओं की कविताओं से विविध प्रांतीय लोक जीवन को दृश्यमान बना सुधीजनों से वाह-वाही प्राप्त की। जी हां; हम आपको बता रहे हैं मुक्ति संस्था के मेरे आंगन कार्यक्रम के तहत हुए भारतीय भाषाओं का कविता-उत्सव के बारे में ।  कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन में कहानीकार-व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि बीकानेर शहर की गरिमा में इस बात को भी रेखांकित किया जाना चाहिए कि यहां न केवल राजस्थानी, हिंदी और उर्दू वरन अन्य भारतीय भाषाओं में भी लेखन हो रहा है। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध सामाजसेवी और राजस्थानी लोक संस्कृति के विद्वान भंवर पृथ्वीराज रतनू ने स्मरण करवाया कि डिंगळ और राजस्थानी की समृद्ध परंपरा हमारे यहां रही है और भाषाओं की विविधता में कविता अपने भीतर नाद की जो झांकी श्रवण से प्रगट करती है उसके लिए भाषा के बंधन नहीं होते। उन्होंने कार्यक्रम में पठित कविताओं पर हर्ष प्रकट करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि आज के कार्यक्रम में एक छोटा भारत अपनी विविधताओं को एकता के सूत्र में पिरोकर यहां प्रस्तुत किया गया है। 

कार्यक्रम में पठित कविताओं पर आलोचनात्मक टिप्पणी के अंतर्गत प्रख्यात साहित्यकार पत्रकार मधु आचार्य आशावादी ने कहा कि कविता दिखने में जितनी सहज और सरल होती है वह उतनी ही जटिल और गुंफित विन्यास की मांग करती है। विभिन्न भारतीय भाषाओं की कविताओं को उनमें प्रस्तुत भाव और संवेदनाएं ही वे घटक हैं जो उन्हें दूर तक ले जाने में सक्षम है। 

कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया ने कहा कि कोई कवि जिस किसी भी भाषा में लिखता हो उसे अपनी परंपरा,लोक-साहित्य और समकालीन साहित्य से अच्छा खासा परिचय रखना चाहिए, अन्यथा वह कुछ रचते हुए भी कुछ नवीन अवदान नहीं दे सकता। 

आए हुए कवियों और आगंतुक सुधि श्रोताओं का स्वागत करते हुए हिंगलाज रतनू ने कहा कि हर्ष का विषय है कि इस प्रांगण में इतने कवि विभिन्न भाषाओं की काव्य रचनाओं के साथ उपस्थित हुए हैं जो निश्चय ही हमारे आस्वाद का विस्तार करने वाले हैं। कार्यक्रम के संयोजक और कवि-कहानीकार राजेन्द्र जोशी ने कार्यक्रम के विषय में विस्तार से जानकारी देते हुए मुक्ति संस्थान द्वारा मेरे आंगन कार्यक्रम की अवधारणा को स्पष्ट किया वहीं विभिन्न भारतीय भाषाओं के लिए बीकानेर के साहित्यकारों के अवदान को भी रेखांकित किया। 

हिंदी कवि नवनीत पाण्डे ने ‘आसमान में घोंसला तो नहीं बना सकते’, ‘सोचो राजन सोचो !’ एवं ‘वसंत’ गीत प्रस्तुत कर माहौल को कविता मय कर दिया। लेखक आत्माराम भाटी ने राकेश टी. कांतिवाल द्वारा किया हुआ कवि डॉ.नीरज दइया की राजस्थानी कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद कार्यक्रम में प्रस्तुत किया। वहीं डिंगळ के प्रमुख हस्ताक्षर गिरधर दान रतनू ‘दासोड़ी’ ने अपनी राजस्थानी और डिंगळ कविताओं के माध्यम से नई ऊर्जा और ओज का संचार किया। ‘सुरराज करी गजराज सवारिय, मौज वरीसन आज मही।’ के साथ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं कविताओं को श्रोताओं ने पसंद किया। 

उर्दू के शायर वली गौरी ने अपने अलग अंदाज में गजल के हर शेर पर दाद बटोरते अमन और भाईचारे का संदेश दिया। कवयित्री डॉ. मंजू कच्छावा ने पंजाबी में दो गजलों को तरन्नुम के साथ प्रस्तुत किया । सिंधी कवि साहित्यकार मोहन थानवी ने वर्तमान हालात पर संस्कारों और अपनेपन की बात की। थानवी की कविताओं में सिंधी संस्कृति की हवा का एक झौंका और आंगन में ऊर्जा देती जलती अग्नि का दृश्य जैसे कविता में साकार हो उठा। बंगाली भाषा की कविता प्रस्तुत करते हुए कवयित्री सुश्री पूर्णिमा मित्रा ने एक दिन की झलक प्रस्तुत की वहीं अपने कुछ अनुभव भी श्रोताओं के बीच साझा किए। 

हिंदी गीत के अंर्तगत वसंत के आगमन को अपनी सुरीली आवाज में कवयित्री डॉ. रेणु व्यास ने साझा किया तो राजस्थानी कवि गौरीशंकर प्रजापत ने जीवन और समाज के गूढ रिश्तों काे कविता में रेखांकन करते हुए खुलासा किया। राजस्थानी और डिंगळ कविताओं के पाठ के अंतर्गत कवि कवि जगदीश रतनू, साहित्यकार मोईनूद्दीन कोहरी, कवि कैलाश रतनू ने अपनी कविताएं प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि सरदार अली परिहार, मुनीन्द्र अग्निहोत्री, राहुल रंगा ‘राजस्थानी’, शंकरलाल व्यास, नदीम अहमद नदीम आदि अनेक श्रोता उपस्थित रहे।  आभार कवि नाटककार हरीश बी. शर्मा ने प्रकट किया। 

रवीन्द्र रंगमंच के लिए यूआईटी को मिले 2.85 करोड़

​केंन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री द्वारा बीकानेर के रंगकर्मियों को बड़ी सौगात

बीकानेर/08.02.2017 बीकानेर के निर्माणाधीन रवीन्द्र रंगमंच हेतु नेशनल टैगोर कल्चर थियेटर स्कीम के अन्तर्गत कला एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 2.85 करोड़ रूपये की प्रथम किस्त नगर विकास न्यास, बीकानेर हेतु जारी की। कला एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अपर सचिव द्वारा जारी पत्र क्रमांक में उपरोक्त राशि की स्वीकृति जारी की।

ज्ञान्तव्य है कि केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा से 11.07.2016 को मिलकर बीकानेर में 1994 से निर्माणाधीन रवीन्द्र रंगमंच हेतु टैगौर कल्चर थिऐटर स्कीम में शामिल कर वित्तिय अनुदान देने का आग्रह किया था। वित्त राज्य मंत्री ने बीकानेर के रवींन्द्र रंगमंच को यहां के रंगकर्मियों एवं कला प्रेमियों एवं आम जन की आकांक्षों का स्मारक बताते हुए सम्पूर्ण डी.पी.आर. द्वारा प्रस्तुत किया था।

कंेद्रीय कला एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा रवीन्द्र रंग मंच की कुल लागत 9.5 करोड का 60 प्रतिशत का हिस्सा केंद्रीय अनुदान के रूप में स्वीकार करते हुए कुल 5.7 करोड रूपये स्वीकृत किये है, जिसकी पहली किस्त के रूप में 2.85 करोड रूपये आज दिनांक 07.2.2017 को जारी किये गये है। 

रवीेन्द्र रंगमंच हेतु केन्द्रीय अनुदान मिलने पर बीकानेर के रंगकर्मियों, कलाप्रेमियों, एवं नगर निगम महापौर नारायण चौपडा, भाजपा के नन्दकिशोर सोलंकी, सत्यप्रकाश आचार्य, प्रभूदयाल सारस्वत,  विजय आचार्य, बिहारीलाल बिश्नोई, रामेश्वरलाल पारीक, मोहन सुराणा, पाबूदान सिंह राठौड, सुरेन्द्र सिंह शेखावत, अखिलेश प्रताप सिंह, हुकमाराम मेघवाल, प्रधान कन्हैयालाल सियाग, श्यामसिंह हाडला, महावीर रोडा, हनुमानप्रसाद सांखी, छगनलाल प्रजापत, विनोद धवल ने केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का आभार प्रकट किया।