जहां देखा वहां तुम

प्रवृति और प्रकृति जब बदलाव के संकेत देती है तब विकास का आगामी चरण शुरू होता है। विकास शब्द अच्छाई के लिए है। प्रवृति में बदलाव प्रेम के लिए होता है। प्रकृति में परिवर्तन को लगाव; चाहत; ममता के कारण समझ सकते हैं। दोनों स्थितियों में बड़ा अंतर है किंतु सूक्ष्म दृष्टि से देखें तो केन्द्र में अपनत्व को पाएंगे। प्रेम; लगाव; चाहत; ममता का अपनत्व विहीन होना संभव नहीं है बल्कि इनकी प्रारंभिक अवस्था ही अपनत्व है। 

युगपक्ष : ​रंग-नगरी में पहला नाट्यालेख-कोष स्थापित; रंगकर्म मतलब आत्म-जागरण; हम सब रंगकर्मी

रंग-नगरी में पहला नाट्यालेख-कोष स्थापित

रंगकर्म मतलब आत्म-जागरण; हम सब रंगकर्मी

बीकानेर 27/3/17 ( मोहन थानवी)। रंग-नगरी बीकानेर में “नाट्यालेख-कोष” की स्थापना सहित विश्व रंगमंच दिवस पर अनेक आयोजन हुए। स्वास्थ्य विभाग ने नुक्कड़ नाटक से रंगकर्मियों के दल से सेहतमंद रहने का संदेश प्रेषित करवाया। संगीत भारती द्वारा नाटक के अभिन्न अंग संगीत विषय के गुजरात से यहां आए शोधार्थियों को सम्मानित कर बीकाणे का गौरव बढ़ाया। मुक्ति संस्था व स्वामी कृष्णानंद फाउंडेशन द्वारा गरिमामयी समारोह में  ढोलमारू होटल के सभागार में ‘रंगमंच की दिशा और दशा’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने रंगकर्म को आत्म-जागृति का सशक्त माध्यम और सभी को रंगकर्मी की संज्ञा दी व कहा कि संसार रूपी नाटक के हम पात्रों को ईश्वर निर्देशित करता है। अतिथियों ने  रंगकर्म क्षेत्र के लिए समाज और राज्य को सकारात्मक होकर रंगमंच को सुदृढ़ बनाने के लिए अत्यावश्यक उपाय करने; साधन देने और संसाधनों का संरक्षण करने के यज्ञ में आहुतियां देने के स्वर बुलंद किए। यहीं पर गायत्री प्रकाशन के त्वावधान में संयोजक हरीश बी शर्मा की देखरेख में  नाट्य स्क्रिप्ट बैंक का शुभारंभ की घोषणा की गई। दोनों आयोजक संस्थाओं व सखा संगम संस्थान समेत शहर के रंगकर्मी; साहित्यकार;  पत्रकार प्रतिनिधियों ने रंगकर्मी मधु आचार्य ‘आशावादी’ का उनके जन्मदिवस पर अभिनंदन किया ।

कार्यक्रम अध्यक्ष कर्नल हेम सिंह; मुख्य अतिथि नगर विकास न्यास के अध्यक्ष महावीर रांका; विशिष्ट अतिथि कवि सरदार अली परिहार ; एन. डी. रंगा ने विचार विनिमय किए।

 आगंतुकों का स्वागत फाउंडेशन के हिंगलाज दान रतनू ने किया। वरिष्ठ व्यंग्यकार-कहानीकार बुलाकी शर्मा ; कवि-आलोचक डॉ.नीरज दइया; वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मण राधव ने रंगमंच व रंगकर्म पर अपनी बात साझा की। वरिष्ठ नाटककार दयानंद शर्मा ने बीकानेर की रंग यात्रा काो रेखांकित किया। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मुक्ति के सचिव राजेन्द्र जोशी ने किया । आभार साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार ने ज्ञापित किया।

​रन फोर राजस्थान’ से दिया एकता और साम्प्रदायिक सद्भाव का संदेश

रन फोर राजस्थान’ से दिया एकता और साम्प्रदायिक सद्भाव का संदेश

बीकानेर, 26 /3/17 ( मोहन थानवी )। राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे  कार्यक्रमों के तहत रविवार को संभाग स्तरीय मशाल दौड़ ‘रन फोर राजस्थान’ में बड़ी संख्या में प्रतिभागी बने लोगों ने एकता और साम्प्रदायिक सद्भाव का संदेश दिया। आम लोगों का उत्साहवर्धन करने वालों में पुलिस के जवान, खिलाड़ी, सरकारी कर्मचारी, स्काउट-गाइड और छात्र शामिल थे।  मैराथन में बास्केटबाॅल के इंटरनेशनल खिलाड़ी ओमप्रकाश ढाका, साइक्लिस्ट दयालाराम, राजेन्द्र एवं दिनेश सहित छात्रों; खिलाड़ियों से  जिला कलेक्टर वेदप्रकाश ने परिचय प्राप्त किया। मैराथन को अतिरिक्त संभागीय आयुक्त डाॅ. राकेश कुमार शर्मा ने गांधी पार्क से इसे हरी झंडी दिखाई और रैली मेजर पूर्ण सिंह सर्किल, अाम्बेडकर सर्किल, तुलसी सर्किल, बिश्नोई धर्मशाला से होते हुए जूनागढ़,  फोर्ट डिसपेंसरी से कलेक्टर कार्यालय पहुंची जहां जिला कलेक्टर  आरएसी के बैंड की स्वर लहरियां के बीच रैली का स्वागत किया। 

मैराथन में बीकानेर के अलावा संभाग के अन्य तीनों जिलों से मशालें पहुंची। जिला खेल अधिकारी हरिराम चौधरी ने बताया कि ये मशालें 27 मार्च को जयपुर में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह में पहुंचेगी। इस दौरान पर्यटन अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह, खेलकूद प्रशिक्षण केन्द्र के श्रवण भांभू सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। अंत में खेल अधिकारी ने सभी प्रतिभागियों का आभार जताया। 

​नवसम्वत महोत्सव :  धर्मयात्रा 28 को; जूनागढ़ के सम्मुख करेंगे महाआरती 

बीकानेर 25/3/17 ( मोहन थानवी) ।  भारतीय संस्कृति की परम्परा का निर्वहन करते हुए हिन्दू जागरण मंच  28 मार्च को नवसम्वत पर शहर के अंदरुनी क्षेत्र से धर्मयात्रा निकालेगा। धर्मयात्रा  प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई जूनागढ़ के सम्मुख पहुंचेगी। वहां महाआरती की जाकर सभा का आयोजन होगा साथ ही  दो तस्वीरें मां और भारत माता का पूजन किया जाएगा। यह जानकारी शनिवार को होटल वृन्दावन में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में मंच के प्रांत सह-संयोजक जेठानंद व्यास ने दी। सम्मेलन में बजरंग तंवर भी मौजूद रहे। व्यास ने बताया कि जूनागढ़ के सामने कार्यकर्म में अखिल भारतीय सह-संयोजक कमलेश सिंह व  संवित् सोमगिरि महाराज का सान्निध्य रहेगा। 

धर्मयात्रा में आगे-आगे मोटरसाइकिल सवार; पीछे जीप, घोड़े, ऊंटों का टोला और डीजे के साथ भारत माता की झांकी होगी।यात्रा में व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए प्रशासन को भी सूचित कर दिया गया है।

यह रहेगा रुट

धर्मयात्रा एम.एम.ग्राऊण्ड से रवाना होकर पुष्करणा स्टेडियम, गोकुल सर्किल, नत्थूसर गेट, बारहगुवाड़, सदाफते, रत्ताणी व्यासों का चौक, हर्षों का चौक, मोहता चौक, तेलीवाड़ा, दाऊजी रोड़, जोशीवाड़ा, शहर के हृदय स्थल कोटगेट, एम.जी.रोड़, शार्दूलसिंह सर्किल होते हुए जूनागढ़ पहुंचेगी और वहां भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा।  व्यास ने कहा कि मंच के बैनर तले यह चैत्र शुक्ल पक्ष नव संवत्सर के तहत नववर्ष मनाने का चौथा वर्ष है। पहले समाज के लोग सोए हुए थे लेकिन अब धीरे-धीरे जाग रहे हैं। समाज का कार्यक्रम है, समाज के लोग अब ध्यान रख रहे हैं। मंच का कहीं भी किसी भी प्रकार का कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि लोगों को साथ लेकर महाउत्सव मनाना लक्ष्य है, उन्होंने आव्हान किया कि समाज का मेले जैसा उत्सव है और सब मिलजुलकर इसे मनाएं।

हर घर पर ऊं लिखा हुआ झण्डा लगे, रंगोली सजे

जेठानंद व्यास ने सभी से आग्रह किया है कि चैत्र नववर्ष प्रतिपदा एकम के मौके पर अपने-अपने घर पर ऊं लिखा हुआ झण्डा लगाए और घरों के आगे रंगोली सजाएं ताकि पता चल सके कि नववर्ष का  उत्सव हम इस तरह से मना रहे हैं।

शस्त्र नहीं लाने का आह्वान

हिन्दू जागरण मंच के जेठानंद व्यास ने पत्रकारों के माध्यम से एक ऐसा संदेश भी दिया कि जिसमें बताया गया कि प्रत्येक हिन्दू का दायित्व है कि वह अपशब्द नहीं बोले और धर्मयात्रा में किसी भी प्रकार का शस्त्र (तलवार) लेकर नहीं आए हालांकि उन्होंने यह बात भी कही कि कुछ उत्साही युवक उत्साह के साथ ऐसा कर जाते हैं लेकिन उनके मन में किसी भी प्रकार का पाप नहीं होता है। हां यदि कोई तलवार या शस्त्र लेकर आता है तो वह उत्पाती की श्रेणी में आ जाएगा। इसी वजह से पिछली दफा आयोजित धर्मयात्रा में थोड़ी दिक्कतें महसूस हुईं। 

रंग कहते हैं – 1 / होली के रंग

होली रंगों का त्योहार है। रंग खुशी देते हैं। खुशी व्यक्ति और समाज के विकास का आधार बनती है। यानी खुशी से काम करने वाला विकसित होता है। कन्फ्यूशस ने कहा था, काम से प्रेम करने वाले को कभी भी काम नहीं करना पड़ता क्योंकि प्रेम काम नहीं है। सूफी संतों ने भी अपने संदेश में कुछ ऐसी ही बातें कही हैं। युवा पीढ़ी को सूफियाना गीत बेहद पसंद हैं जिन्हें युवक-युवतियां सुनते और गुनगुनाते रहते हैं। बहुत से गीतों के अर्थ भी समझते हैं तो कितने ही गीतों को केवल लय-ताल पर थिरकते हुए सुनते और बिसरा देते हैं। दरअसल सूफी गीतों में जीवन में खुशी भरने वाले रंग भरे हुए हैं। होली का वर्तमान स्वरूप छद्म है, असल नहीं। युवा पीढ़ी को भी इस बात की जानकारी है कि बीते समय में होली बुराई को दूर कर अच्छाई को समाज में प्रसारित करने का एक माध्यम रही। होली के बहाने आस पास के मोहल्ले वाले, यार-दोस्त, गांव के लोग और समग्र समाज एकजुट खड़ा होता था जो आज एकरूप खड़ा तो होता है लेकिन इस काम में कुछ गतिविधियां ऐसी भी शामिल हो गई हैं जो होली के मूलभाव-स्वरूप को बिगाड़ने वाली कही जा सकती हैं। जैसे कि होली पर नशा कर गाली-गलौच करना। नशे में व्यक्ति की मति मारी जाती है और वह झगड़ा तक कर बैठता है। खैर, बात पश्चिमी दुनिया के एक विद्वान कन्फ्यूशस के द्वारा प्रेम और काम संबंधी कथन से शुरू हुई थी, युवा पीढ़ी को भी अपनी रुची के काम से प्रेम करना चाहिए। जिसे डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करनी है उसे इंजीनियरिंग की लाइन में आनंद नहीं आएगा। इसी प्रकार से जिस बच्चे को गणित में आनंद आता हो उसे साहित्यिक अध्ययन रास नहीं आता। इसलिए हमारे बुजुर्गों ने बहुत पहले कहा था, कर्म प्रधान होता है। कर्म भगवान है। काम की पूजा यानी भगवान की पूजा। यानी काम से प्रेम करो। देखो, होली के रंग तो स्नान करने से उतर जाएंगे लेकिन आध्यात्मिक रंग और गहरे होते जाते हैं। बीते कुछ सौ सालों में हमारी जननि जन्म भूमि पर पहुंचे विदेशी, बाहरी लोगों की संस्कृति की ओर तत्कालिक लोगों का ध्यानाकर्षण शनै शनै होने के कारण हमारी पारम्परिक सांस्कृतिक गतिविधियां प्रदूषित होने लगी जिससे हमारी प्राचीन सभ्यता प्रभावित हुई और होली जैसे पावन पर्व के खुशरंग किन्हीं अप्रिय रंगों के पार्श्व में जाने लगे। प्राचीन भारतीय संस्कृति-सभ्यता और होली के खुशरंगों में समाई जीवन की खुशहाली के बारे में हमें हमारी भावी पीढ़ी को बताकर जाग्रत करना ही चाहिए। उठो जागो।
( दैनिक युगपक्ष में प्रकाशित )