​​“अधजागी रातां : अधसूता दिन” महेन्द्र मोदी की राजस्थानी कृति का लोकार्पण समारोह

​“अधजागी रातां : अधसूता दिन” महेन्द्र मोदी की राजस्थानी कृति का लोकार्पण समारोह
बीकानेर 25 जून 2017। राजस्थानी भाषा के उत्थान और विकास के लिए ऐसी अनेक पुस्तकों को आना चाहिए जिससे हमारी भाषाई अस्मिता की व्यापक पहचान पुख्ता हो सके। यह कहना है वरिष्ठ लेखक-पत्रकार ओम थानवी का।    वे यहां मुक्ति संस्था व स्वामी कृष्णानंद फाउंडेशन के त्वावधान में ढोला मारू होटल में आयोजित  बीकानेर के कहानीकार-उपन्यासकार महेश चंद्र जोशी के स्मृति-दिवस पर उनको समर्पित आयोजन में महेन्द्र मोदी के संस्मरणों की राजस्थानी कृति “अधजागी रातां : अधसूता दिन” का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किए जाने के बाद बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे ।  थानवी ने मोदी की लेखन शैली को सराहते एवं स्मृतियों के वातायन से बीकानेर से जुड़े कई प्रसंगों को रेखांकित करते हुए कहा कि महेंद्र मोदी की इस पुस्तक द्वारा बीकानेर का सांस्कृतिक इतिहास जिन शब्दों और भाषा में प्रस्तुत हुआ है वह उल्लेखनीय है। अगर किसी पुस्तक के द्वारा पाठक का अपना स्मृति-लोक खुलता चला जाए तो इसे पुस्तक की सार्थकता माना जाना चाहिए। ओम थानवी ने कहा राजस्थानी में अधिकतम साहित्य सृजन किया जाए तो  राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष को बल मिलेगा। भंवर पृथ्वीराज रतनू ने भी विचार रखे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक डॉ. श्रीलाल मोहता ने कहा कि महेन्द्र मोदी के पास प्रख्यात साहित्यकार अन्नाराम सुदामा सदृश्य भाषा-शैली है जो पाठकों को प्रभावित करती है। इस अवसर पर मंचस्थ अतिथियों के साथ विविध भारती के पूर्व चैनल हैड एवं पुस्तक के लेखक महेन्द्र मोदी का सांझी विरासत द्वारा सम्मान भी किया गया। संचालक मुक्ति के सचिव राजेन्द्र जोशी ने कहा कि महेन्द्र मोदी की इस पुस्तक में अनुभूतियों का प्रामाणिक चित्रण हुआ है। 

कार्यक्रम के आरंभ में दोनों संस्थाओं की तरफ से हिंगलाज दान रतनू ने आगंतुकों का स्वागत किया । 

रायसिंहनगर से आमंत्रित  अतिथि कवि-आलोचक डॉ. मंगत बादल ने पुस्तक की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए लेखन से प्रकाशन तक की यात्रा के संस्मरण साझा करते हुए कहा कि यह कृति राजस्थानी संस्मरण विधा को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण मुकाम के रूप में पहचानी जाएगी   । अतिथि  व्यंग्यकार कहानीकार बुलाकी शर्मा ने महेन्द्र मोदी की कृति से अनेक संस्मरणों को साझा किया पुस्तक के प्रवाह और पठनीयता को उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि इससे राजस्थानी गद्य साहित्य को एक आयाम मिलेगा।

कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया ने अपने पत्रवाचन में ‘अधजागी रातां : अधसूता दिन’ को महेन्द्र मोदी की आत्मकथा का प्रथम भाग बताते हुए कहा कि इस पुस्तक को इसके विधागत महत्त्व और अभिव्यंजना कौशल क्षमता से इस दशक की महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में स्थान मिलेगा।

कार्यक्रम में कोटा के साहित्यकार पुरुषोत्तम पंचोली सहित बड़ी संख्बीया में कानेर के संस्कृतिकर्मी उपस्थित थे।
– मोहन थानवी

हां कोई और हैं वो

इस सभ्य युग से घृणा करने वाले/वालों को खोजने निकल पड़े हैं लोग
तलाशा जा रहा है उन्हें शवों के जंगल में जहां बीज नहीं भंग-अंग रौपे जाते हैं
शव मुस्करा रहे हैं घृणित को खोजने वालों पर और बतिया रहे हैं अपने बीच फल-फूल रहे जानवरों से
वहीं-कहीं शव में तब्दील होने से बचा और दुबका मैं और मुझ जैसे मेरे साथी थरथरा रहे हैं इस भय से कि हैवानों को खोज रहे लोग कहीं हमें भी जकड़ न लें अपने कुत्सित विचारों की जंजीरों से और दे दें हम सभी को शवों के मध्य जीने का दुस्साहस करने का दंड
हम भयभीत हैं और यह भी जानते हैं कि सभ्य युग से घृणा करने वाले/वालों को नागवार होता है शवों के बीच श्वास लेना 
किंतु हम किसे बताएं कि सभ्य युग के शत्रु हममें से कोई नहीं; वे यहां मुर्दों में नहीं रहते
हां कोई और हैं वो जो अपनी ही कल्पित दुनिया में बस रहे हैं; भर रहे हैं दिमागों में जहर और तालाबों में रक्त; काट रहे हैं सभ्यता के अंग और बनाने में जुटे हैं शवों के जंगल
हां वे मानव तो कदापि नहीं कोई और हैं वो 
                                        *.- मोहन थानवी.*

21/6/17 1:10 pm bikaner

हां कोई और हैं वो http://bahubhashi.blogspot.com/2017/06/blog-post_21.html

​बीकानेर जिले के चार विद्यालय क्रमोन्नत, तीन खाजूवाला क्षेत्र के

बीकानेर, 3 जून 2017।   बीकानेर जिले में चार स्कूलों को क्रमोन्नत किया गया है। इनमें से तीन विद्यालय खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र के हैं। सरकार के इस निर्णय पर खाजूवाला विधानसभा के लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की है तथा संसदीय सचिव एवं विधायक डाॅ. विश्वनाथ मेघवाल का आभार जताया है। 

संसदीय सचिव के प्रवक्ता राकेश सहोत्रा ने बताया कि वर्ष 2015-16 की बजट घोषणा की अनुपालना में राज्य के 33 राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों को राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में क्रमोन्नत किया गया है। खाजूवाला विधानसभा की पेमासर, शेरपुरा खारबारा और थारूसर के उच्च प्राथमिक विद्यालयों को क्रमोन्नत किया गया है। इससे इन गांवों के बच्चों को माध्यमिक स्तर की पढ़ाई के लिए गांव से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। जिले की चौथी क्रमोन्नत स्कूल सहनीवाला की है। नवक्रमोन्नत विद्यालयों में सत्र 2017-18 में कक्षा 9 प्रारम्भ होगी। वहीं दूसरे वर्ष दसवीं कक्षा की पढ़ाई प्रारम्भ हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि संसदीय सचिव के प्रयासों से खाजूवाला में प्रत्येक सूची में स्कूलों का क्रमोनयन हो रहा है, जो विधानसभा क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं की दृष्टि से सकारात्मक सिद्ध होगा। 

– मोहन थानवी

​मोदी सरकार की नितिया केवल व्यापारियों के ख़िलाफ़ है : वेद

बीकानेर 3/6/17 (वेद प्रकाश अग्रवाल )।  ​मोदी सरकार की नितिया केवल व्यापारियों के ख़िलाफ़ है। अब GST को ही देख लो , प्रचार तो हो रहा था की एक देश एक ही टैक्स , परंतु लागू हो रहा है एक ही देश में IGST , GST, और SGST। यानी तीन प्रकार के टैक्स। टैक्स दरे भी एक नहीं चार चार। टैक्स दरों की जो लिस्ट  जारी की गयी है वो आम आदमी के समझ के बाहर है। 

प्रचार हो रहा था वे बिल यानी रोड पर्मिट हट जाएँगे और अब हर ५०००० के माल की ट्रान्स्पोर्ट करने पर राज्य के अंदर भी रोड पर्मिट आवश्यक है। 

छोटे व्यापारी कहा से लाएँगे कम्प्यूटर?

कहा से लाएँगे ऑपरेटर की सैलरी ?

कैसे देंगे हर महीने C A की फ़ी ?

कौन भरेंगे उनकी रिटर्न ? 

जो स्टॉक पड़ा है उसपे इनपुट नहीं मिला तो नुक़सान कैसे सहे ?

माल क्रेडिट में बेचते है पर GST तो तुरंत जमा करो  …. भाई कैसे ? 

व्यापारी वो वर्ग है जो कभी आरक्षण नहीं माँगता और कभी नोकरी नहीं माँगता बल्कि रोज़गार के अवसर देता है। कृपया GST में जो क़ानून बन रहे है उन्हें व्यापारियों के और देश के हित में बनाए।  हम GST का विरोध नहीं कर रहे है परंतु वर्तमान में जो व्यवस्था GST के अंतर्गत आने जा रही है उसे पुनः विचार कर ख़ामियों को दूर करने का निवेदन करते है। 

विनीत :- भारत के आभागे व्यापारी जिन्होंने भाजपा को vote दिया था। (वेद/  व्हाट्सअप ग्रुप से साभार )