ज्योतियूं जग में जगाईं मुहिंजा लाल साईं… भजनों पर झूमा सिन्धी समाज

*खबरों में बीकानेर*/

ज्योतियूं जग में जगाईं मुहिंजा लाल साईं… भजनों पर झूमा सिन्धी समाज

बीकानेर 23 अगस्त 2017 बुधवार। ज्योतियूं जग में जगाईं मुहिंजा लाल साईं… भजन पर थिरकते झूमते सिन्धी समाज के कलाकारों ने देर तक लिलिपोंड पर समां बांधे रखा। अवसर था संत कंवरराम सिन्धी समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में बुधवार को चालिया महोत्सव पूर्णाहुति के पूर्व दिवस पर भारतीय सिंधु सभा एवं मातृ शक्ति सत्संग मंडल द्वारा झूलेलाल जी की आराधना और सत्संग-कीर्तन का। इस अवसर पर चालिया महोत्सव मनाए जाने संबंधी परम्परा के बारे में भारतीय सिन्धु सभा महिला इकाई की अध्यक्ष भारती ग्वालानी ने जानकारी साझा की। समाज की महिला गायिका कलाकारों सरला पंजाबी, भारती ग्वालानी, रुक्मणी वलीरमानी, कलादेवी, वर्षा लखानी, देवी नवानी, कान्ता हेमनानी, कमला सदारंगानी, सुमन आहूजा, ज्योति, निर्मला, चन्द्रा, भगवानी देवी ने झांझ, मंजीरा आदि सिन्धी वाद्ययंत्रों के अलावा ढोलक, हारमोनियम आदि के साथ एक के बाद एक कई भजनों की प्रस्तुति दी। इसके अलावा भक्ति संगीत में समाज के युवा गायक मनीष भगत ने झूलेलाल जी के भजन सुनाए। नानक हिन्दुस्तानी, हासानन्द जी, मोहन सदारंगानी, किशन सदारंगानी, सीरू ग्वालानी ने भी भजन सुनाए। केवा देवी, वर्षा लखानी , कान्ता आदि ने भजनों पर सिन्धी लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर भगवान झूलेलाल की सवारी पलो मछली के प्रतिरूपी मछलियों को अखो अर्पित किया गया। पल्लव आरती मनीष भगत ने करवाई। सभी ने समाज सहित नगर और देश में खुशहाली की अरदास की। किशन सदारंगानी ने बताया कि चालीस दिन चलने वाले चालिया महोत्सव की पूर्णाहुति पर 24 अगस्त को धोबीतलाई की संत कंवरराम धर्मशाला में सुबह प्रभातफेरी से लेकर देरशाम को ज्योति विसर्जन तक भक्ति संगीत और सत्संग के विभिन्न आयोजन दिनभर किए जाएंगे। — किशन सदारंगानी 9414952790

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महाराजा दाहरसेन जयंती पर कार्यक्रम सिन्धुपति का संदेश गुरुवार को

बीकानेर 23 अगस्त 2017 बुधवार । सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन की जयंती की पूर्व सन्ध्या पर गुरुवार 24 अगस्त शाम को छह बजे संत कंवरराम धर्मशाला धोबीतलाई में ‘‘सिन्धुपति का संदेश‘‘ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। भारतीय सिन्धु सभा महानगर के तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में समाज के वक्ता श्याम सुन्दर आहूजा, हासानन्द मंघवानी दाहरसेन की जीवनी और उनके संदेश पर संबोधित करेंगे। मौजूद सभी लोगों द्वारा दाहरसेन को पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी।

— मोहन थानवी

9460001255

संगठन मंत्री, भारतीय सिन्धु सभा, महानगर बीकानेर

कर्मचारी कल्याण समिति महाराजा गंगा सिंह विष्वविद्यालय, बीकानेर बाबा रामदेव पैदल यात्रियों हेतु निःषुल्क चाय, नाष्ते आदि की सेवाऐं

*खबरों में बीकानेर*/

बीकानेर। 22 अगस्त कर्मचारी कल्याण समिति, महाराजा गंगा सिंह विष्वविद्यालय, बीकानेर की ओर से बाबा रामदेव पैदल यात्रियों के लिए जैसलमेर हाईवे नं. 15 पर महाराजा गंगा सिंह विष्वविद्यालय के आगे निःषुल्क चाय, नाष्ता एवं भोजन की व्यवस्था की गई। कर्मचारी कल्याण समिति के अधिकारियों/कर्मचारियों के सहयोग से आयोजित इस षिविर में पैदल यात्रियों की सेवा की गई। समिति के राजेन्द्र पारासर एवं आनन्दी लाल गढ़वाल ने बताया कि समिति द्वारा हर वर्ष रामदेवरा पैदल यात्रियों की सेवार्थ कर्मचारियों एवं जन सहयोग से इन षिविरों का आयोजन किया जाता रहा है। इस अवसर पर हनुमानगढ़, नापासर, श्रीडूंगरगढ़, हरियाणा आदि के भक्तो ने बाबा रामदेवर यात्रा के लिए कूच किया। षिविर में महेष व्यास, देवकीनन्दन व्यास, विनोद हर्ष, उमेष व्यास, महेन्द्र आचार्य आदि के अलावा बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं ने अपनी सेवाऐं दी।

न्यास अध्यक्ष रांका ने टेर मंडल कार्यालय का किया उद्घाटन

*खबरों में बीकानेर*/ बीकानेर। मंगलवार को जोशीवाड़ा में टेर मंडल पूनरासर सेवा समिति के कार्यालय का उद्घाटन नगर विकास न्यास अध्यक्ष महावीर रांका व पार्षद प्रेमरतन जोशी ने किया। राजस्थान ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष उमाशंकर आचार्य ने बताया कि टेर मंडल करीब 40 वर्षों से पूनरासर में पदयात्रियों को सेवा देता आया है। टेर मंडल अध्यक्ष एडवोकेट गिरधर जोशी ने बताया कि इस बार 27, 28 व 29 अगस्त तीन दिन लगातार भोजन व्यवस्था पूनरासर में प्रदान की जाएगी। मंगलवार को न्यास अध्यक्ष रांका ने पूजन कर कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राजकुमार जोशी, एडवोकेट हीरालाल जोशी, भूरसिंह जोशी, अशोक थानवी तथा प्रणव भोजक सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

-मोहन थानवी

योग शिक्षकों ने दी स्वर्गीय डूडी को श्रद्धांजलि

बीकानेर, 19 अगस्त। पूर्व जिला उप प्रमुख जेठारामजी डूडी की पुण्यतिथि पर जवाहर पार्क में आने वाले योग शिक्षकों बड़ी संख्या में लोगों ने शुक्रवार को एक सभा में श्रद्धांजलि दी। योग शिक्षक कन्हैयालाल सुथार ने श्रद्धांजलि सभा में कहा कि स्वर्गीय जेठारामजी डूडी मधुरभाषी,जनप्रिय, समाज सेवी एवं हर व्यक्ति की सेवा व सहयोग के लिए तत्पर रहने वाले अनूठी प्रतिभा के धनी थे । योग शिक्षक नंद लाल शर्मा, कन्हैयालाल सुथार, पाबूराम सारण,प्रहलाद सिंह चौधरी, गणेश व्यास, रामदेव सुथार, उदय शंकर आचार्य, युवा स्वाभिमान अध्यक्ष दीपक शर्मा, पूनम पूनिया, श्रीमती लक्ष्मी देवी राजपुरोहित, भंवरी देवी गोदारा, भंवर लाल बिश्नोई, मदन मोहनभाटी, देव किशन कुलरिया सहित अनेक लोगों ने स्वर्गीय जेठाराम डूडी को पुष्पांजलि व श्रद्धांजलि दी।

पेंशनरों के लिए निःशुल्क फोटो कॉपी मशीन की सुविधा शुरू

बीकानेर, 19 अगस्त। पेंशनर्स वैलफेयर सोसयटी बीकानेर की ओर से शनिवार को पी.बी.एम. अस्पतालपेंशनरों के लिए निःशुल्क फोटो कॉपी की स्थापना की गई। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आर.पी.अग्रवाल ने फोटो कॉपी मशीन का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर डॉ.एस.एन.हर्ष, डॉ.रंजन माथुर व डॉ.लियाकत गौरी सहित अनेक चिकित्सक व पेंशनर वैलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष वी.के.गोयल, सचिव ब्रह्म प्रकाश गुप्ता, कोषाध्यक्ष विश्वनाथ अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य मौजूद थे। डॉ.अग्रवाल ने संगठन के संरक्षक मोतीराम गुप्ता पेंशनरों के लिए समर्पित भाव से कार्य करने पर सम्मान किया।

​​“अधजागी रातां : अधसूता दिन” महेन्द्र मोदी की राजस्थानी कृति का लोकार्पण समारोह

​“अधजागी रातां : अधसूता दिन” महेन्द्र मोदी की राजस्थानी कृति का लोकार्पण समारोह
बीकानेर 25 जून 2017। राजस्थानी भाषा के उत्थान और विकास के लिए ऐसी अनेक पुस्तकों को आना चाहिए जिससे हमारी भाषाई अस्मिता की व्यापक पहचान पुख्ता हो सके। यह कहना है वरिष्ठ लेखक-पत्रकार ओम थानवी का।    वे यहां मुक्ति संस्था व स्वामी कृष्णानंद फाउंडेशन के त्वावधान में ढोला मारू होटल में आयोजित  बीकानेर के कहानीकार-उपन्यासकार महेश चंद्र जोशी के स्मृति-दिवस पर उनको समर्पित आयोजन में महेन्द्र मोदी के संस्मरणों की राजस्थानी कृति “अधजागी रातां : अधसूता दिन” का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किए जाने के बाद बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे ।  थानवी ने मोदी की लेखन शैली को सराहते एवं स्मृतियों के वातायन से बीकानेर से जुड़े कई प्रसंगों को रेखांकित करते हुए कहा कि महेंद्र मोदी की इस पुस्तक द्वारा बीकानेर का सांस्कृतिक इतिहास जिन शब्दों और भाषा में प्रस्तुत हुआ है वह उल्लेखनीय है। अगर किसी पुस्तक के द्वारा पाठक का अपना स्मृति-लोक खुलता चला जाए तो इसे पुस्तक की सार्थकता माना जाना चाहिए। ओम थानवी ने कहा राजस्थानी में अधिकतम साहित्य सृजन किया जाए तो  राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष को बल मिलेगा। भंवर पृथ्वीराज रतनू ने भी विचार रखे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक डॉ. श्रीलाल मोहता ने कहा कि महेन्द्र मोदी के पास प्रख्यात साहित्यकार अन्नाराम सुदामा सदृश्य भाषा-शैली है जो पाठकों को प्रभावित करती है। इस अवसर पर मंचस्थ अतिथियों के साथ विविध भारती के पूर्व चैनल हैड एवं पुस्तक के लेखक महेन्द्र मोदी का सांझी विरासत द्वारा सम्मान भी किया गया। संचालक मुक्ति के सचिव राजेन्द्र जोशी ने कहा कि महेन्द्र मोदी की इस पुस्तक में अनुभूतियों का प्रामाणिक चित्रण हुआ है। 

कार्यक्रम के आरंभ में दोनों संस्थाओं की तरफ से हिंगलाज दान रतनू ने आगंतुकों का स्वागत किया । 

रायसिंहनगर से आमंत्रित  अतिथि कवि-आलोचक डॉ. मंगत बादल ने पुस्तक की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए लेखन से प्रकाशन तक की यात्रा के संस्मरण साझा करते हुए कहा कि यह कृति राजस्थानी संस्मरण विधा को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण मुकाम के रूप में पहचानी जाएगी   । अतिथि  व्यंग्यकार कहानीकार बुलाकी शर्मा ने महेन्द्र मोदी की कृति से अनेक संस्मरणों को साझा किया पुस्तक के प्रवाह और पठनीयता को उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि इससे राजस्थानी गद्य साहित्य को एक आयाम मिलेगा।

कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया ने अपने पत्रवाचन में ‘अधजागी रातां : अधसूता दिन’ को महेन्द्र मोदी की आत्मकथा का प्रथम भाग बताते हुए कहा कि इस पुस्तक को इसके विधागत महत्त्व और अभिव्यंजना कौशल क्षमता से इस दशक की महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में स्थान मिलेगा।

कार्यक्रम में कोटा के साहित्यकार पुरुषोत्तम पंचोली सहित बड़ी संख्बीया में कानेर के संस्कृतिकर्मी उपस्थित थे।
– मोहन थानवी

हां कोई और हैं वो

इस सभ्य युग से घृणा करने वाले/वालों को खोजने निकल पड़े हैं लोग
तलाशा जा रहा है उन्हें शवों के जंगल में जहां बीज नहीं भंग-अंग रौपे जाते हैं
शव मुस्करा रहे हैं घृणित को खोजने वालों पर और बतिया रहे हैं अपने बीच फल-फूल रहे जानवरों से
वहीं-कहीं शव में तब्दील होने से बचा और दुबका मैं और मुझ जैसे मेरे साथी थरथरा रहे हैं इस भय से कि हैवानों को खोज रहे लोग कहीं हमें भी जकड़ न लें अपने कुत्सित विचारों की जंजीरों से और दे दें हम सभी को शवों के मध्य जीने का दुस्साहस करने का दंड
हम भयभीत हैं और यह भी जानते हैं कि सभ्य युग से घृणा करने वाले/वालों को नागवार होता है शवों के बीच श्वास लेना 
किंतु हम किसे बताएं कि सभ्य युग के शत्रु हममें से कोई नहीं; वे यहां मुर्दों में नहीं रहते
हां कोई और हैं वो जो अपनी ही कल्पित दुनिया में बस रहे हैं; भर रहे हैं दिमागों में जहर और तालाबों में रक्त; काट रहे हैं सभ्यता के अंग और बनाने में जुटे हैं शवों के जंगल
हां वे मानव तो कदापि नहीं कोई और हैं वो 
                                        *.- मोहन थानवी.*

21/6/17 1:10 pm bikaner

हां कोई और हैं वो http://bahubhashi.blogspot.com/2017/06/blog-post_21.html