Dharti+Aasman, Khabron Me Bikaner, poem

आसमान कभी नहीं देता पनाह धरती के चोरों को

अच्छा है वो आसमान और बहुत अच्छी है धरा ये दोस्त बनाए रखती है हवाएं भी इनको तभी बरसता है प्रेम मिलता है हम सबको बादलों ने रंगों से सजी धरा से इंद्रधनुष चुरा कर इठलाकर मुस्कराना सीखा आसमान पर हवाओं ने पकड़ी चोरी तेज तेज चल कर बादलों ने शरमा के लौटा दिए सब… Continue reading आसमान कभी नहीं देता पनाह धरती के चोरों को

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