Dharti+Aasman, Khabron Me Bikaner, poem

आसमान कभी नहीं देता पनाह धरती के चोरों को

अच्छा है वो आसमान और बहुत अच्छी है धरा ये
दोस्त बनाए रखती है हवाएं भी इनको
तभी बरसता है प्रेम मिलता है हम सबको
बादलों ने रंगों से सजी धरा से इंद्रधनुष चुरा कर
इठलाकर मुस्कराना सीखा आसमान पर
हवाओं ने पकड़ी चोरी तेज तेज चल कर
बादलों ने शरमा के लौटा दिए सब रंग बरस कर
आसमान कभी नहीं देता पनाह धरती के चोरों को

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Itna to muskra banta hai sir

Dushwariyan bahut hai
N hansenge to Ro denge
duniya fabtiya kasegi hum par
bina vajah hansegi
or hum Ro denge Akaran
isliye khushi pal sanjote huwe
muskrane do jee bhar ke
dor-e-dushwariyon me
Itna to muskrana banta hai sir